मासूम निगाहों को…

मासूम निगाहों को…

मासूम निगाहों को मुस्कुराते देखा है
मैंने अपनी मोहब्बत को तुम्हे दिल में छुपाते देखा है।

बादलों में जो छिप जाता है वो चाँद,
मैंने रोज़ उसे तुम्हारे दुपट्टे को सजाते देखा है।

कुछ इस तरह तुम्हे खुदको आज़माते देखा है,
मेरी मौजूदगी में तुम्हे पलके झुकाये देखा है।

वो जो गुज़रती है तुम्हारे खिड़की से नीचे सड़क,
अक्सर तुम्हे उस पर पलकें बिछाये देखा है।

क्यूं ना रौशन हो मेरी ज़िन्दगी तुम्हारे होने से,
मैंने हर सजदे में तुम्हे आंसू बहाते देखा है।

जब पूछती है मुझसे दुनिया तुम्हारी पहचान,
मैंने परदे में तुम्हे खुद को छुपाते देखा है।

मासूम निगाहों को मुस्कुराते देखा है,
मैंने अपनी मोहब्बत को तुम्हे दिल में छुपाते देखा है।

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